नक्षत्र
नक्षत्र: इतिहास, संरचना और उपयोग
27 नक्षत्र आकाशीय “समय‑खंड” हैं — चन्द्रमा प्रतिदिन जिन तारामंडलों/क्षेत्रों से गुजरता है। यहाँ आपको परिभाषा, इतिहास, सूची, राशि‑अंश, अधिपति, संकेतों के साथ एक इंटरैक्टिव आकाश‑आकृति का एनिमेशन भी मिलेगा।
परिचय
नक्षत्र वैदिक काल से पंचांग का मूल हैं। चन्द्र की गति को 27 समान भागों (प्रत्येक 13°20′) में बाँटकर समय की सूक्ष्म लय समझी जाती है। मुहूर्त, यात्रा, संस्कार, और व्यक्तिगत दशा‑क्रम (विंशोत्तरी) में इनका केंद्रीय स्थान है।
आकाश में नक्षत्र — एनिमेटेड दृश्य
नक्षत्र सूची (राशि‑अंश, अधिपति, संकेत)
| # | नक्षत्र | राशि‑अंश (लम्बाई) | अधिपति (ग्रह) | संकेत/कीवर्ड |
|---|
पंचांग, मुहूर्त और दशा में भूमिका
पंचांग में
- तिथि‑वार‑नक्षत्र त्रय से दिन का स्वभाव समझा जाता है।
- कार्यों की योजना — अध्ययन, यात्रा, साक्षात्कार, संस्कार के लिए अनुकूल दिन।
मुहूर्त और दशा
- मुहूर्त: नक्षत्र‑स्वभाव और योग‑करण के साथ चयन।
- विंशोत्तरी दशा: जन्म‑चन्द्र नक्षत्र से दशा‑क्रम आरम्भ; क्रम: केतु‑शुक्र‑सूर्य‑चन्द्र‑मंगल‑राहु‑गुरु‑शनि‑बुध (आवर्तन)।
कैसे निकाले अपना नक्षत्र
- किसी विश्वसनीय पंचांग/ज्योतिष सॉफ्टवेयर में जन्म समय‑स्थान डालें।
- जन्म‑चन्द्र की दीर्घांश देखें और 13°20′ के खण्ड में उसका क्रम ज्ञात करें — वही आपका जन्म‑नक्षत्र।
- जन्म‑नक्षत्र की तिथि (दशा‑आरम्भ) और पाद (चार भागों में) भी नोट करें।
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