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नक्षत्र और राशि — विज़ुअल एक्सप्लनेशन

नक्षत्र और राशि — विज़ुअल एक्सप्लनेशन 12 राशियाँ (प्रत्येक 30°) और 27 नक्षत्र (प्रत्येक 13°20′) — चन्द्रमा/सूर्य की कक्षा पर समय के खण्ड। नीचे दिया गया एनिमेशन दिखाता है: किसी भी दीर्घांश (0–360°) पर कौन‑सी राशि, कौन‑सा नक्षत्र और कौन‑सा पाद आता है। यह इंटरएक्टिव भाग शुद्ध HTML + CSS + JavaScript (JS) में बनाया गया है। इंटरएक्टिव आकाशीय रिंग (Rāśi & Nakṣatra) Longitude (°): 23.5° Auto Play Pause ☀️ Sun 🌙 Moon बाहरी रिंग: 12 राशियाँ (30°) भीतरी रिंग: 27 नक्षत्र (13°20′) ग्लो सेक्टर: चुना गया क्षेत्र ☀️/🌙: सूर्य/चन्द्र मार्कर राशि क्या है? नक्षत्र क्या है? राशि (12×30°) आकाशीय पथ (एक्लिप्टिक) पर 360° को 12 बराबर भागों में बाँटा गया — प्रत्येक 30°। नाम: मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, ...

नक्षत्र

नक्षत्र: इतिहास, संरचना और उपयोग 27 नक्षत्र आकाशीय “समय‑खंड” हैं — चन्द्रमा प्रतिदिन जिन तारामंडलों/क्षेत्रों से गुजरता है। यहाँ आपको परिभाषा, इतिहास, सूची, राशि‑अंश, अधिपति, संकेतों के साथ एक इंटरैक्टिव आकाश‑आकृति का एनिमेशन भी मिलेगा। परिचय नक्षत्र वैदिक काल से पंचांग का मूल हैं। चन्द्र की गति को 27 समान भागों (प्रत्येक 13°20′) में बाँटकर समय की सूक्ष्म लय समझी जाती है। मुहूर्त, यात्रा, संस्कार, और व्यक्तिगत दशा‑क्रम (विंशोत्तरी) में इनका केंद्रीय स्थान है। स्मरण: नक्षत्र ≠ राशि। 12 राशियों की तरह 27 नक्षत्र चन्द्रमा के दैनिक पथ का अधिक सूक्ष्म मानचित्र हैं। आकाश में नक्षत्र — एनिमेटेड दृश्य नक्षत्र चुनें: Auto Play Pause नीला रिंग: कक्ष (Ecliptic) 27 सेगमेंट: नक्षत्र‑खण्ड चमकते सितारे: तारामंडल ग्लो सेक्टर: चुना गया नक्षत्र नक्षत्र सूची (राशि‑अंश, अधिपति, संकेत) ...

ज्योतिष: इतिहास, परम्परा और आज के समय में उपयोग

ज्योतिष: इतिहास, परम्परा और आज के समय में उपयोग यह आरम्भिक पोस्ट शिक्षार्थियों के लिए—ज्योतिष क्या है, इसकी ऐतिहासिक जड़ें क्या हैं, प्रमुख शाखाएँ और ग्रंथ कौन‑से हैं, गणितीय आधार क्या है, और आज के समय में इसका जिम्मेदार उपयोग कैसे करें। ज्योतिष क्या है? (परिभाषा और उद्देश्य) ‘ज्योतिष’ परम्परागत रूप से वेदांगों में सम्मिलित वह विद्या है जो खगोलीय पिण्डों (सूर्य, चन्द्र, ग्रह, नक्षत्र) की गति‑स्थिति, काल‑निर्णय (पंचांग, तिथि, मुहूर्त) और उनके आधार पर व्यावहारिक निर्णय (होरा/फल‑ज्योतिष) से सम्बन्ध रखती है। इसका मूल उद्देश्य समय की लय को समझकर जीवन के निर्णयों में स्पष्टता लाना है—न कि भाग्य को कठोर रूप से तय घोषित करना। स्मरण: परम्परा में ‘ज्योतिष’ का एक अंग पूर्णतः गणित/खगोल (सिद्धान्त/गणित ज्योतिष) है, और दूसरा अंग व्याख्या/फल (होरा/संहिता) है—दोनों का संतुलन आवश्यक है। संक्षिप्त इतिहास: वैदिक से आधुनिक काल तक वैदिक आधार वेदांग ज्योतिष (लाघव/लागध परम्परा) में नक्षत्र‑पद्धति, ऋतु/यज्ञ के लिए काल‑निर्णय और प्र...